Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
संकल्पमात्रं हि जगज्जलमात्रं यथार्णवः ।
ऋते संकल्पमन्या ते नास्ति संसारदुःखिता ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे समुद्र एकमात्र जलरूप है वैसे ही सारा संसार संकल्पमात्र ही हे,
संकल्प को छोड़कर दूसरी वस्तु संसारदुःख नहीं हे, अर्थात् संकल्प ही संसाररूप दुःख है