Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
नासौ तव न चास्य त्वं भ्रान्तिं पुत्र परित्यज ।
असत्ये सत्यवद्दृष्टे भावना मा स्म हीदृशः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पुत्र, यह संसार न तो तुम्हारा सम्बन्धी
है और न इसके सम्बन्धी तुम हो । तुम यह मेरा सम्बन्धी है या मैं इसका सम्बन्धी हूँ, ऐसी भ्रान्ति का
त्याग करो । असत्य वस्तु को सत्य के तुल्य देखने पर इसकी भावना उचित नहीं है