Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
असत्यामेति संसारः स्वव्यवस्थां विचारतः ।
दीपालोकादिवान्धस्य द्वीन्दुत्वं स्वीक्षितादिव ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
विचार से संसार स्वनिष्ठबाध को ऐसे प्राप्त होता है जैसे कि दीपक का
प्रकाश होने पर अन्धकारवश क्षीण दर्शनशक्तिवाले पुरुष की अन्धता निवृत्त हो जाती है और जैसे
भली-भाँति देखने से द्विचन्द्रता की निवृत्ति हो जाती है