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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

संकल्पो हि मनो जीवश्चित्तं बुद्धिः सवासना । नाम्नैवान्यत्वमेतेषां नार्थेनार्थविदां वर ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

संकल्प के शान्त होने पर भी जीव, चित्त, वासना आदि से दुःख होया ही । एसी आशंका करके चित्त आदि का संकल्प में ही अन्तर्भाव कहते है । संकल्प ही मन, जीव, चित्त तथा वासनासहित बुद्धि हे । इनका नाम से ही भेद है । हे अथवित्ताओं में श्रेष्ठ, अर्थतः इनमें भेद नहीं हे