Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
दाशूर उवाच ।
अनन्तस्यात्मतत्त्वस्य सत्तासामान्यरूपिणः ।
चितश्चेत्योन्मुखत्वं यत्तत्संकल्पाङ्कुरं विदुः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
दाशूर ने कहा : हे पुत्र, अनन्त, सत्तासामान्यरूपी
आत्मतत्त्वरूप चित् की जो विषयोन्मुखता है, उसी को संकल्परूपी वृक्ष का अंकुर कहते हैं