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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

असंकल्पनमात्रेण स्वेनेवाशु विनश्यति । श्रेयसे परमायस्य नाशत्वेन तु संभवः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

तेनाऽऽशु स विनश्यति“ इसके तात्पर्य को कहते हैं। अनेक करोड़ों जन्मों में दु:ख का अनुभव करके भाग्यवश निर्वेद को प्राप्त होकर शास्त्र, आचार्य और समाधि के अभ्यास से आत्मतत्त्व का साक्षात्कार होने पर संकल्प के अभावमात्र से वह शीघ्र नष्ट हो जाता है। संकल्प की वासनाक्षयप्रयुक्त शून्यभाव से जो अभिनिष्पत्ति है, वह परम कल्याण के लिए होती है