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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

क्षणमभ्युदयं यान्ति क्षणं शाम्यन्ति दीपवत् । देहगेहेषु संकल्पतरङ्गाः सागरेष्विव ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सागर में तरंग क्षणभर में उदित होती है और क्षण भर में विलीन हो जाती है, वैसे ही देहरूपी घर में संकल्प की वृत्तियाँ क्षणभर में दीपक के समान उदित होती हैं और क्षणभर में नष्ट हो जाती हैं