Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
यथा कुसूले मार्जारो भस्त्रायां भुजगो यथा ।
मुक्ताफलं यथा वेणावहङ्कारस्तथा तनौ ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे कि देह ही अहंकार है, अन्य अहंकार नहीं है, तो इस पर नहीं, ऐसा कहते हैं।
जैसे कोठिले में बिल्ली रहती है, जैसे धौंकनी में साँप रहता है और जैसे बसि में मोती रहता है वैसे
ही शरीर में अहंकार भी है