Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
कर्णनासास्यताल्वादिवातायनगणान्विताः ।
भुजाद्यङ्गप्रतोलीकाः पञ्चेन्द्रियकुदीपकाः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
कान, नासिका,
मुख, तालू, आदि बहुत-सी खिडकियो से वे युक्त है, भुजा आदि अंगरूपी सड़कों से वे व्याप्त हैं और
पाँच इन्द्र्यो ही उनमें कुत्सित पच दीपक हैं