Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अथापवरकौघेषु चलत्सु स महीपतिः ।
करोति विविधां क्रीडां नीडेष्विव विहङ्गमः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकारों की सृष्टि करने के उपरान्त उन देव, मनुष्य आदि के देहसमूहों के
व्यवहार करने पर संकल्पात्मा जीवरूपी वह राजा जैसे घोंसले में चिड़िया विविध प्रकार की क्रीड़ाएँ
करती है वैसे ही विविध प्रकार की क्रीड़ाएँ करता है