Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
तत्रैवापारगगने नगरं तेन निर्मितम् ।
चतुर्दशमहारथ्यं विभागत्रयभूषितम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी असीम आकाश में उसने ब्रह्माण्डरूपी नगर की, चौदह भुवन ही
जिसके बड़े भारी रथों का समूह है या चौदह विद्यारूपी रथ्यामार्गो से जो विभक्त है, रचना कर रक्खी
है और वह त्रिलोकरूप और वेदत्रयीरूप विभाग से विभूषित है