Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
यदीयां विततारम्भां लीलां निर्माणभासुराम् ।
न मनागनुवर्तन्ते शक्रोपेन्द्रहरा अपि ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जिसकी लीला का, जो प्रयोजन थोड़ा होने पर
भी हजारों कल्पनाओं से पूर्ण होने के कारण विशाल आरम्भवाली है और स्वप्न, मनोरथआदि के
निर्माण से दैदीप्यमान है, इन्द्र, विष्णु और शंकर तनिक भी अनुकरण नहीं कर सकते हैं