Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
कश्चिदेव निवासो मे नार्थिनामिति तुष्टितः ।
नृत्यन्तमिव बह्वाढ्यलतावलयवल्गनैः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
मूल, कोटर, कन्धा, शाखा, पत्र, पुष्प
आदि प्रदेशों मेँ से मेरा कोई एक ही प्रदेश आश्रयप्रार्थी मनुष्य, मृग, पक्षी आदि का निवास नहीं हे,
किन्तु ओर भी सभी अंग उनके निवास के उपयोगी है, अहा ! परोपकार में मेरे सभी अंग सफल हैं,
यों सन्तोष के कारण पत्र-पुष्पों से पूर्णं बहुत-सी लताओं की चंचलता से मानों वह नाचता था