Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
असौ तपस्वी भगवन्विपिने केन हेतुना ।
कथं चाप्यवसत्पृष्ठे कदम्बस्य महातरोः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन, वे महातपस्वी वन में कदम्ब के विशालवृक्ष की चोटी पर किसके
प्रभाव से ओर कैसे रहते थे ?