Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
तस्याथ शब्दो वदनात्कदाचिज्जायते पदात् ।
कदाचिदंशात्पृष्ठाद्वा कदाचिल्लोचनात्करात् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके देहाक्यवो से सृष्टि की प्रवृत्ति दिखाते हैं ।
इसके अनन्तर कभी उसके मुँह से, कभी चरण से, कभी उसके अग्रभाग से, कभी पीठ से, कभी
नेतरो से ओर कभी बाहुओं से ब्राह्मण आदि शब्द अपने अर्थो के साथ यथा योग्य उत्पन्न होते हँ, अतएव
(ब्राह्मणोऽस्य मुखमासीत्" ऐसी श्रुति हे