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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 34

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

कदाचित्प्रथमं तेजः प्रतिष्ठामधिगच्छति । ततः प्रजायते कर्ता तेजसोऽसौ प्रजापतिः ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

कभी वायु पहले स्थूलता से स्थिति को प्राप्त होता है, उससे ब्रह्मा उत्पन्न होते हैं, इसलिए वे वायुज प्रजापति कहे जाते हैं ॥३ ३॥ कभी तेज पहले स्थूलतारूप से स्थिति को प्राप्त होता है, उससे सृष्टिकर्ता ब्रह्मा उत्पन्न होते है, इसलिए वे तैजस प्रजापति कहे जाते हैं