Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verses 32–33

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verses 32–33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

कदाचित्प्रथमं व्योम प्रतिष्ठामधिगच्छति । ततः प्रजायते ब्रह्मा व्योमजोऽसौ प्रजापतिः ॥ ३२ ॥ कदाचित्प्रथमं वायुः प्रतिष्ठामधिगच्छति । ततः प्रजायते ब्रह्मा वायुजोऽसौ प्रजापतिः ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

कभी पद्म से उत्पन्न हुए ब्रह्मा होते हैं ऐसा जो कहा उसमें यथा योग्य पंचीकरण के अनन्तर होनेवाले स्थूल आकाश आदि का प्रथम आविभवि क्रम ही नियामक है, ऐसा कहते है। कभी आकाश पहले स्थूलतारूप से स्थिति को प्राप्त होता है, उससे ब्रह्मा उत्पन्न होते हैं, इसलिए आकाशज प्रजापति कहे जाते हैं