Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मण्यन्या भविष्यन्ति ब्राह्म्यो ब्रह्मपुरश्रियः ।
पुनस्ताश्च विनङ्क्ष्यन्ति भूत्वा भूत्वा यथा गिरः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मपुर से उपलक्षित हृदयाकाश की शोभारूप ब्रह्मनिर्मित अन्य ब्रह्माण्ड परम्पराएँ जैसे ध्वनि के भेद
आकाश में हो-होकर नष्ट हो जाते हैं , वैसे ही हो-हो करके फिर ब्रह्म में नष्ट हो जाती हैं