Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
न च विज्ञायते कस्मात्कालात्प्रभृति चागताः ।
नित्यागमापायपरा एताः सर्गपरम्पराः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उन सृष्टियों के प्रवाह की अनादिता को कहते हैं।
किस समय से लेकर ये नित्य उत्पन्न ओर विनष्ट होनेवाली सृष्टि परम्पराएँ प्राप्त हुई, यह नहीं
जाना जा सकता