Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
यथा मशकजालानि वर्षादिष्वाकुलानि तु ।
उत्पत्त्योत्पत्त्य नश्यन्ति तथेमा लोकसृष्टयः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वर्षा आदि ऋतुओं मे
बहुत से मच्छर आदि के समूह उत्पन्न हो-हो कर नष्ट हो जाते हैं, वैसे ही ये लोक सृष्टियाँ उत्पन्न हो-
हो कर नष्ट हो जाती हैं