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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

उच्चैःपदाय परया प्रज्ञया वासनागणात् । पुष्पाद्गन्धमिवोदारं चेतो राम पृथक्कुरु ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

जीवन्मुक्ति में वासनाओं से चित्त को बाहर करना ही मुख्य साधन है, ऐसा कहते है । हे श्रीरामचन्द्रजी, जीवनमुक्तिरूप उन्नत पद प्राप्ति के लिए उत्कृष्ट बुद्धि द्वारा वासनाओं से विवेक, वैराग्य आदि से उत्कृष्ट चित्त को फूल से सुगन्ध की नाई अलग कीजिये