Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
गन्धर्वनगरस्यार्थे दूषिते भूषिते तथा ।
अविद्यांशे सुतादौ वा कः क्रमः सुखदुःखयोः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
गन्धर्वनगर के पदार्थो के नष्ट -भ्रष्ट या भूषित होने पर
ओर अविद्याजनित पुत्र आदि के नष्ट या सुशोभित होने पर सुख और दुःख का प्रकार ही क्या है ?