Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
संसाराडम्बरस्यास्य प्रपञ्चरहिते क्रमे ।
सम्यग्ज्ञा नानुपश्यन्ति ये हतास्ते कुबुद्धयः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
प्रपंचरहित ब्रह्म में विवेक, वैराग्य, ज्ञान में अप्रमाद आदिगुणों के अर्जनक्रम से जो सम्यक् ज्ञानी हैं, वे
इस संसाराडम्बर को नहीं देख पाते | जो कुबुद्धि हैं यानी उक्त गुणों से रहित हैं, वे तो नष्ट ही हैं