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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 51

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

श्रीवाल्मीकिरुवाच । इत्युक्तवत्यथ मुनौ दिवसो जगाम सायंतनाय विधयेऽस्तमिनो जगाम । स्नातुं सभा कृतनमस्करणा जगाम श्यामाक्षये रविकरैश्च सहाजगाम ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : मुनि के ऐसा कहने पर दिन बीत गया। सूर्य अस्ताचल को चले गये । सभा मुनिजी को नमस्कार करके सायंकाल की सन्ध्या विधि के लिए स्नानार्थ चली गई । दूसरे दिन रात बीतने पर सूर्योदय के साथ-साथ फिर सभा लग गई