Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
सदेव वा यदत्यन्तं तस्य किं नाम नश्यति ।
ब्रह्मैवेदं जगत्सर्वं सुखदुःखे किमुत्थिते ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
अध्यस्त दृष्टि से नाश के असंभव का उपपादन कर अधिष्ठान दृष्टि से भी उसका उपपादन
करते है ।
अथवा जो अत्यन्त सत् ही है उसका क्या नाश होता है ? यह सब जगत एकमात्र ब्रह्म ही है, तो
सुख ओर दुःख किसके कारण उदित हों ! अर्थात् वे उदित है ही नहीं