Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
यदसत्तदसत्स्याच्चेन्न किं कस्य किल क्षतम् ।
ततो हर्षविषादानां संसारे नाम नास्पदम् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
जो असत् हे,
वह यदि अविद्यमान ही हो जाय, तो किसका क्या बिगड़ा ? अर्थात् कुछ भी नहीं । इसलिए संसार में हर्ष
और शोक का विषय कुछ भी नहीं है