Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
असदभ्युदितैर्भावैर्जलान्तश्चन्द्रवच्चलैः ।
वञ्च्यते बाल एवेह न तत्त्वज्ञो भवादृशः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
जल के भीतर चन्द्रप्रतिबिम्ब के तुल्य क्षणभंगुर मिथ्या उदित हुए
पदार्थों से इस लोक में बालक ही ठगा जा सकता है, आपके तुल्य तत्त्वज्ञानी पुरुष नहीं ठगा जा सकता
है