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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

असदेतदिति ज्ञात्वा माऽत्र भावं निवेशय । अनुधावति न प्राज्ञो विज्ञाय मृगतृष्णिकाम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

यह असत्‌ है, यह जानकर इससे प्रम न कीजिये । विद्वान पुरुष "यह मृगजल है” यह जानकर उसके पीछे नहीं दौड़ते