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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

प्रपञ्चपतनारम्भं प्रमत्तस्य इदं जगत् । सकामतृष्णामननं त्यक्त्वान्यद्राम भावय ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

विचारहीन पुरुष की काम तृष्णा मननरूप यह जगत स्वर्ग, नरक, तिर्यग्‌ आदि योनियों में पतन का आरम्भक है । इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, आप विवेक से जगत का त्याग करके निष्प्रपंच आत्मा की भावना कीजिये