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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

इन्द्रजालमिदं विद्धि मायारचितपञ्जरम् । मनोमनननिर्माणं न सन्नासदिव स्थितम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

माया से जिसका पिंजर रचा गया है, मन के मनन से ही जिसका निर्माण हुआ है, ऐसे इस दृश्य को आप इन्द्रजाल जानिये। यह सत्‌ नहीं है, फिर भी सत्य के समान स्थित है