Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यथा नौयायिनो मिथ्या स्थाणुस्पन्दमतिस्तथा ।
असत्यैवोत्थिता नित्यमाकाराणां परम्परा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे नौका से यात्रा कर रहे लोगों की मिथ्या ही स्थाणु में चलन प्रतीति
होती है वैसे ही दृश्य आकारों की परम्परा नित्य असत्य ही उदित हुई हे