Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
तत्पुर्यष्टकमित्युक्तं भूतहृत्पद्मषट्पदम् ।
तस्मिंस्तु तीव्रसंवेगाद्भावयद्भास्वरं वपुः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
आगे कही जानेवाली देह की भावना से लिंग शरीर के ही पचीकरण द्वारा घन होने पर स्थूल देह की
उत्पत्ति होती है, ऐसा कहते है।
उसमें तीव्र वासना से स्थूल शरीर की भावना करता हुआ मन पाक से बिल्वफल के समान स्थूलता
को प्राप्त होता हे