Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
वपुर्वह्निकणाकारं स्फुरितं व्योम्नि पश्यति ।
अहंकारकलायुक्तं बुद्धिबीजसमन्वितम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस शरीर को देखता है,
अहंकारकला से युक्त, बुद्धिरूप बीज से सम्पन्न, पंचभूतों के हृदयकमल का भ्रमररूप वह लिंग शरीर
पर्यष्टक कहा जाता हे