Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
इयं सृष्टिरपर्यन्ता मायेव घनमायया ।
श्रीराम उवाच ।
जीवो मनःपदं प्राप्य वैरिञ्चं पदमागतः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे ब्रह्मन्, जीव मन पद को प्राप्त करके जिस प्रकार विरंचिपद को प्राप्त
हुआ, उस प्रकार को आद्योपान्त विस्तारपूर्वक शीघ्र मुझसे कहने की कृपा कीजिये