Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
एवं जीवो हि संकल्पवासनारज्जुवेष्टितः ।
दुःखजालपरीतात्मा क्रमादायाति चित्तताम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार संकल्पवासनारूपी रस्सी से
परिवेष्टित और विविध दुःखों से व्याप्त जीव ही क्रम से बाह्य पदार्थ के चिन्तन की सामर्थ्य को प्राप्त
होता हे