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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

यां तां कथयितुं जातिं राम राजससात्त्विकीम् । मनोवीर्यविचारार्थं प्रस्तुतोऽस्मीह तां श्रृणु ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

अब उसके लिए जीव के अवतरणक्रम का वर्णन करने के लिए चालीसवें सर्ग मे "तासां सम्यकू प्रवक्ष्यामि तावद्राजससात्विकी: इससे जो प्रतिज्ञा की है, उसके अवशिष्ट अंश के वर्णन का यों स्मरण कराते हैं। हे श्रीरामचन्द्रजी, मन के पराक्रम के विचारार्थ जिस राजस, सात्विक जीव जाति का वर्णन करने के लिए मैं यहाँ पर प्रस्तुत हूँ, उसे आप सुनिये