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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

उदितैषा प्रकाशाख्या चिच्छक्तिः परमात्मनः । देशकालक्रियाशक्तीर्वयस्याः संप्रकर्षति ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

अन्यान्य शक्तियो की प्रवृत्ति वितृशक्ति के उदय के अधीन ही है, स्वतन्त्ररूप से उनकी प्रवृत्ति नहीं हो सकती, ऐसा कहते है। परमात्मा से उदित हुई यह प्रकाशरूप चित्‌शक्ति अपनी सखीरूप देशकाल क्रियाशक्तियों का आकर्षण करती है यानी देशकालक्रियाशक्ति सखी के तुल्य उसका अनुगमन करनेवाली हे