Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verses 32–33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, verses 32–33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
नूनं स्थितिमुपायाता समासाद्य पदं स्थिता ।
कुतो जातेयमिति ते राम मास्तु विचारणा ॥ ३२ ॥
इमां कथमहं हन्मीत्येषा तेऽस्तु विचारणा ।
अस्तं गतायां क्षीणायामस्यां ज्ञास्यसि राघव ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, यह अविद्या कहाँ से प्राप्त हुई, ऐसा विचार आप मत
कीजिये | इसका कैसे नाश करूँ, यही विचार आप कीजिए