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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

आत्मज्ञानादृते तच्च शास्त्रार्थात्समवाप्यते । अविद्यासरितः पारमात्मलाभादृते किल ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, परमात्मा की प्राप्ति के बिना अविद्यारूपी नदी का पार नहीं मिलता है। अविद्या नदी का पारभूत परमात्मा का लाभ ही अक्षय परम पद है