Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
संस्थितिं नाधिगच्छन्ति पटा इव वितन्तवः ।
उह्यमानो ह्यविद्यायामात्मा नेहोपलक्ष्यते ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि अविद्या है ही नहीं, तो शास्त्र किसलिए है 2 इस पर कहते हैं।
अविद्यारूपी नदी में बह रहा आत्मा इस संसार में आत्मज्ञान के बिना अनुभव गोचर नहीं होता।
और वह आत्मज्ञान शास्त्र के तात्पर्यार्थ से ही प्राप्त होता है