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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

नास्त्येषा परमार्थे न त्वेवं भावनयेद्धया । ज्ञो भूत्वा ज्ञेयसंप्राप्तो ज्ञास्यस्यस्यास्त्वमाशयम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

यह माया वस्तुतः नहीं हे, इस भावना के आचार्योपिदेश, श्रुतिवाक्य, तर्क ओर स्वानुभव के अभ्यास द्वारा प्रदीप्त होने पर आप तत्त्वविद्‌ होकर आत्मास्वरूप वास्तविक ज्ञेय तत्व को विस्मृत-कण्ठगत-स्वणभिरण की भाँति प्राप्तकर इस मेरी उक्ति के आशय को समझेंगे