Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
वाक्प्रपञ्चं विना त्वेतदज्ञानमतुलं तमः ।
भेत्तुमन्योन्यमुदितं यत्नं कर्तुं न शक्यते ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
तो इस समय में आपका वाकृप्रपंच किसलिए है, इस पर कहते हैं।
वाकृप्रपंच के बिना इस कारणीभूत अज्ञान तथा मूलअज्ञान का, जो परस्पर की सहायता द्वारा
भ्रान्ति की सैकड़ों हजारों शाखा-प्रशाखाओं से उदित है, मूलोच्छेदन करने के लिए तथा उसके साधनों
में यत्न करने के लिए आप समर्थ नहीं हैं