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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

कलनामलमोहादि किंचिन्नात्मनि विद्यते । नीरागं ब्रह्म परमं तदेवेदं जगत्स्थितम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्वोक्त कलना, उसके निमित्तभूत पूर्वसंस्कार तथा कर्मरूपी मल एवं अविद्या आदि कुछ भी आत्मा में विद्यमान नहीं हैं । वह परमब्रह्म रागहीन है और वही जगतरूप से स्थित है