Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
तज्जयैव मनःशक्त्या स्वतः संज्ञा प्रवर्तते ।
दृढभावनया तस्मादिष्टोऽर्थः प्रतिपद्यते ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त क्रियाशक्ति से उत्पन्न
हुई मनःशक्ति से ही स्वभावतः शब्दविभाग प्रवृत्त होता है, तदनन्तर उससे दृढभावना द्वारा अभीष्ट
अर्थ सम्पन्न होता है