Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
तं विना कल्पनैवान्या नास्ति नापि भविष्यति ।
कुतस्त्यौ क्रमशब्दार्थावुक्तयो व्यवहारजाः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि उसमें इनका सम्भव नहीं है, तो जगत के किसी अन्य मूल की कल्पना कीजिए। इस पर
कहते हैं ।
उसके बिना अन्य कल्पना ही नहीं है और न होगी। भाव यह कि चित्तप्रकाश के बिना अन्य कल्पना
भी अयुक्त है। कारण-कार्य में क्रम शब्दार्थ तथा व्यवहार की उक्तियाँ कहाँ से हो सकती है ?