Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
सर्वमेव सर्वथा सर्वत्र यथा संभवत्येकमेवेह वस्तु विद्यत इति तस्माद्धर्षामर्षविस्मयानां क्व वाऽवसरो राम ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार एक वस्तु सब प्रकार से सब होती है, इसलिए इस विषय में असंभावना, हर्ष और क्रोध
आदि ठीक नहीं हैं, ऐसा कहते हैं।
चूँकि इस जगत में एक ही वस्तु सब जगह सब प्रकार से सब होती है, इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी,
हर्ष, क्रोध और आश्चर्य का अवसर ही कहाँ है ?