Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

तथाच । कुर्वतोऽकुर्वतो वापि स्वर्गेऽपि नरकेऽपि वा । यादृग्वासनमेतत्स्यान्मनस्तदनुभूयते ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त अर्थ में श्लोक को उद्धृत करते हैँ । कहा भी है : पुरुष चाहे कार्य करे या न करे फिर भी उसका मन जिस प्रकार की वासना से युक्त होता है, उसका स्वर्ग अथवा नरक में अनुभव होता है