Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
चेष्टावशात्तादृक्फलभोक्तृत्वं वासनानुरूपं स्पन्दते पुरुषः स्पन्दानुरूपं फलमनुभवति ।
फलभोक्तृत्वं नाम कर्तृत्वादिति सिद्धान्तः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
चेष्टावश वासनानुरूप फलभोक्तृत्व होता है, क्योंकि वासना के अनुसार ही पुरुष चेष्टा करता है
ओर चेष्टा के अनुसार ही फल भोगता हे । कर्तृत्व से फल भोक्तृत्व होता है, ऐसा सिद्धान्त हे