Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
मूलस्थाः फलमायान्ति पेलवा रसलेशकाः ।
संनिवेशं व्रजन्त्येता रेखाः पल्लवपालिषु ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
मूल
में स्थित सुन्दर रसभाव को प्राप्त हुआ चित्तत्त्व ही फलरूपता को प्राप्त होता है वैसे ही मूल में स्थित
रस पल्लवां में प्रविष्ट हो रेखा बनकर पत्र आदि के रूप को प्राप्त होते हैं