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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

पुष्पेषु गन्धतां याति शनैः संचितकेसरम् । मृत्कोटररसोल्लासः स्थाणुतामेति भूतले ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

पुष्पो में धीरे-धीरे केसर का संचय कर चित्तत्त्व ही गन्धता को प्राप्त होता है । मिट्टी के अन्दर स्थित रसस्वरूपता को प्राप्त हुआ चित्तत्त्व ही वृक्ष की वृद्धि द्वारा वृक्ष के मूल के तने के आकार को प्राप्त होता है